भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि बाजार नियामक अगले तीन से पांच वर्षों में शेयर बाजार निवेशकों की संख्या को दोगुना करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने सेबी द्वारा हाल ही में कराए गए एक सर्वेक्षण का जिक्र किया, जिसके नतीजे निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाते हैं। सर्वे में 20% से अधिक लोगों ने कहा कि वे आने वाले समय में किसी न किसी माध्यम से पूंजी बाजार में निवेश करना चाहते हैं।
पांडेय से जब पूछा गया कि अगले कुछ वर्षों में उन्हें क्या हासिल होते देख खुशी होगी, तो उन्होंने कहा,
“हम उम्मीद कर रहे हैं कि निवेशकों की संख्या दोगुनी हो। यदि हम 10 करोड़ नए निवेशक जोड़ लेते हैं, तो यह कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक होगा।”
अक्टूबर 2024 तक भारत में कुल 12.2 करोड़ विशिष्ट निवेशक मौजूद थे। 2020 में कोविड महामारी की शुरुआत के बाद से निवेशकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।
सीआईआई फाइनेंसिंग समिट को संबोधित करते हुए पांडेय ने कहा कि बाजार के माहौल में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बेहतर गुणवत्ता वाली प्रतिभूतियाँ उपलब्ध हों, ताकि निवेशकों का विश्वास बढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक कहानी “किसी बुलबुले पर आधारित नहीं” है। निवेशकों की बढ़ती रुचि का कारण है तेज आर्थिक वृद्धि, सरकारी सुधार, निवेश अनुकूल नीतियाँ और व्यवसाय की सुगमता।
पांडेय ने आगे कहा,
“घरेलू निवेशक आने वाले झटकों के खिलाफ एक मजबूत ढाल साबित होंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी का उद्देश्य अधिक नियम बनाना नहीं, बल्कि ऐसी सरल और प्रभावी नियम पुस्तिका तैयार करना है, जो जोखिमों का समाधान करते हुए नवाचार को प्रोत्साहित करे।
सेबी प्रमुख ने बाज़ार में बढ़ते भरोसे के आँकड़े भी साझा किए।
उनके अनुसार:
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वित्त वर्ष 2025–26 में इक्विटी कैपिटल 2.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई,
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जबकि कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट सात महीनों में 5.5 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया।
ये आँकड़े दर्शाते हैं कि पब्लिक मार्केट देश की दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम हैं और निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

